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इंडोनेशिया: लोम्बोक द्वीप में भूकंप का कहर, मरने वालों की संख्या 555 पहुंची

जकार्ता: इंडोनेशिया के लोगों को हाल के दिनों में भयानक भूकंप का सामना करना पड़ा है. इस भूकंप की वजह से लोम्बोक द्वीप में काफी क्षति पहुंची है और अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,500 लोग घायल हैं. इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन एजेंसी से यह जानकारी मिली है. प्राकृतिक छटा की वजह से छुट्टियां मनाने के लिए बेहद खूबसूरत जगह के रूप में मशहूर बाली द्वीप पर भी 29 जुलाई और पांच अगस्त को भयानक भूकंप आया था. पिछले सप्ताह रविवार को भूकंप के ताजा झटके महसूस किए गए और सबसे तेज झटके की तीव्रता 6.9 थी.

इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि पिछले सप्ताह शुक्रवार को लोम्बोक के उत्तरी हिस्से में ज्यादा लोगों की मौतें हुई. इसके अलावा पड़ोस में स्थित सुमबावा द्वीप में भी कई लोगों की मौत हो गई. कई पीड़ितों की मौत मलबे के नीचे दबने से हो गई क्योंकि भूकंप की वजह से बड़ी संख्या में घर और प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हुए हैं.  इंडोनेशिया में जनजीवन चरमरा गया है.  सड़के टूट गई हैं और मलबे से भरे हुए हैं.

इंडोनेशिया के लोमबोक द्वीप पर शक्तिशाली भूकंप, 

इंडोनेशिया के लोमबोक द्वीप पर भूकंप के कई शक्तिशाली झटके महसूस गए किए हैं. bसमें कम से ककुछ हफ्ते पहले ही भूकंप की वजह से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग बेघर हो गए थे. कल दोपहर के करीब पहले 6.3 तीव्रता का भूकंप आया. इस वजह से भूस्खलन हुआ और लोग जान बचाने के लिए भागे. वहीं लोमबोक के कई इलाकों में बिजली गुल हो गई .  इसके करीब 12 घंटे बाद, 6.9 तीव्रता का ज़लज़ला आया और फिर भूकंप बाद के कई शक्तिशाली झटके महसूस किए गए.

लोमबोक द्वीप पर 29 जुलाई और पांच अगस्त को भी भूकंप आया था जिसमें करीब 500 लोगों की मौत हो गई थी. राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के मुताबिक, रविवार की शाम में आए शक्तिशाली भूकंप में 10 लोगों की मौत हो गई. ज्यादातर लोगों की मौत मलबे की चपेट में आने से हुई. इनमें छह लोगों की मौत पड़ोसी द्वीप सुम्बावा में हुई है.

एजेंसी ने कहा कि लोमबोक में करीब दो दर्जन लोग जख्मी हुए हैं और 150 से ज्यादा घर तथा पूजा स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं. इस महीने के शुरू में आए ज़लज़ले की वजह से लोमबोक में हजारों घर, मस्जिदें और कारोबारी प्रतिष्ठान तबाह हो गए हैं. राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवा नुगरोहो ने बताया कि कल शाम आए भूकंप की चपेट में वो लोग आए हैं जो घर से बाहर थे या आश्रय गृहों में थे. इसलिए हताहतों की संख्या कम है. उन्होंने कहा कि कल सुबह आए भूकंप की दहशत की वजह से लोगों ने घरों से बाहर रहना ही मुनासिब समझा. कल आए भूकंप के झटके बाली तक महसूस किए गए थे लेकिन वहां से नुकसान की खबर नहीं है.

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